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खेल

ज्योतिरादित्य को लगता है कि खेल जीवन के लिए मौलिक हैं और मनोरंजन, स्वास्थ्य और विकास का माध्यम हैं| बहुत कम उम्र से ही उनका लगाव क्रिकेट के प्रति रहा, उनके लिए सम्‍मान की बात थी कि इसके लिए योगदान देने में वे सक्षम हुए। वे मध्‍य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का हिस्‍सा 2002 से थे और बीसीसीआई बोर्ड सदस्‍य के साथ बीसीसीआई कि वित्‍त समिति के सदस्‍य भी हैं।

उनका ध्‍यान खेल के दो पहलुओं में विशेष रूप से था: स्टेडियम के निर्माण के माध्यम से बुनियादी ढांचे में सुधार और मानव संसाधन के जरिये योग्‍य बनाना। जहाँ इसकी सफलता की कहानी ग्वालियर और इंदौर के विश्व स्तरीय स्टेडियम बयां कर रहे हैं, वहीं इसके साथ यह भी जरूरी है कि खेल को प्रेरित करने के लिएए जमीनी स्‍तर पर प्रयास किये जायें।

मध्य प्रदेश क्रिकेट के खेल पर एक स्थायी प्रभाव पड़ा है। प्रसिद्ध होलकर स्टेडियम ने भारत में क्रिकेट स्टेडियम के मंच को ऊपर उठाने के लिए योगदान दिया है। टीम के प्रयासों ने एमपीसीए को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मानचित्र पर वापस आया। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह कि स्‍टार सफलताओं (अभी तक ख्‍याति नहीं मिली) ने प्रशिक्षण के लिए खुद को समर्पित किया जिसके परिणाम स्‍वरूप वे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल), अंडर -19, अंडर -16, और राष्ट्रीय टीमों में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

शिवपुरी का स्टेडियम अब ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ा है और एमपीसीए खेलों की मेजबानी भी करता है।

मध्य प्रदेश में क्रिकेट अब संभागीय स्तर पर अधिक निर्भर नहीं है, बलिक यह जिला और ब्‍लॉक स्‍तर के प्रदर्शन पर निर्भर है। ज्योतिरादित्य इस दृष्टिकोण में विश्‍वास रखते हैं कि राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अपनी प्रतिभा को चमकाने के लिए जमीनी स्‍तर का स्रोत होना जरूरी है। देश में क्रिकेट को एक खेल नहीं बल्कि धर्म माना जाता है, इसलिए खेल को सुलभ बनाना जरूरी है। उन्‍हें इस बात पर गर्व है कि उन्‍होंने गुना में समुदाय के बीच में क्रिकेट की पहुंच को सुगम बनाया है।